बंजारा जनजाति
👉 बंजारा जनजाति घुमक्कड़ जनजाति है एवं इनका समाज पितृसत्तात्मक होता है।
👉 जनगणना 2011 के अनुसार - 487(जो राज्य की जनजाति जनसंख्या का 0.1% है)
👉 यह झारखंड के लगभग सभी क्षेत्र में देखे जाते हैं लेकिन इनका मुख्य सकेंद्र स्थल संथाल परगना प्रमंडल के राजमहल और दुमका क्षेत्र में है।
👉 1956 में इन्हें अनुसूचित जनजाति के श्रेणी में शामिल किया गया।
👉 अपने भाषा को "लंबाड़ी" कहते हैं।
उदाहरण -
यह गांधीजी का देश है - ई गादी जीरो देश छ:
आपका शुभ नाम क्या है- अपेरो नाम कायी छ:
👉 चार समूह - चौहान, पवार , राठौर , उर्वा
👉 बंजारा समाज में वैसे तो गोत्र नहीं पाया जाता है, परंतु कुछ लोग अपने को 'कश्यप' गोत्र बतलाते हैं।
👉 " राय "की उपाधि इनमें काफी प्रचलित है।
👉 सगाई के समय कन्या पक्ष के द्वारा वर पक्ष को कुछ " बैल या नगद ₹140 " दिए जाते हैं।
👉 वधूमूल्य को हरजी कहा जाता है।
👉 मुख्य रूप से प्रचलित विवाह - विधवा विवाह
( जिसे नियोग कहते हैं। )
👉 मुख्य वाद्य यंत्र - नरसिंहा, ठपरा , चिंकारा, ढोल आदि।
👉 यह "अल्लाह - उदल" को अपना वीर पुरुष मानते हैं और यह लोकगाथा बहुत लोकप्रिय है।
👉 इनके गीतों में पृथ्वीराज चौहान का उल्लेख प्राय: मिलता है।
👉 अत्यंत प्रचलित लोक नृत्य - दंड खेलना
👉 आराध्य देवी - बंजारी देवी
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